मध्य प्रदेश में दिवाली पर अवैध कार्बाइड गन के इस्तेमाल से 14 बच्चे स्थायी रूप से अंधे हो गए और 300 से ज्यादा लोग गंभीर आंखों की चोटों का शिकार हुए। जानें इस त्रासदी के पीछे की सच्चाई और सुरक्षा के उपाय।
दिवाली का त्योहार, जो खुशियों और रोशनी का प्रतीक है, इस साल मध्य प्रदेश में एक भयंकर त्रासदी बन गया। अवैध होममेड कार्बाइड गन के चलते कम से कम 14 बच्चे स्थायी रूप से अंधे हो गए और 300 से ज्यादा लोग गंभीर आंखों की चोटें झेल रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या भोपाल में ही दर्ज की गई, जहाँ 186 मामलों में से 15 को सर्जरी की आवश्यकता पड़ी।
त्रासदी कैसे हुई?
कार्बाइड गन, जो अवैध होती हैं, अक्सर बच्चे और युवा दिवाली पर खेल-खेल में इस्तेमाल करते हैं। ये उपकरण फटते हैं और सीधे आंखों पर असर डालते हैं, जिससे स्थायी दृष्टिहानि या अंधत्व हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार गंभीर मामलों में पूर्ण नुकसान का पता 6 महीने के बाद ही चलेगा।
भोपाल का दर्दनाक असर
भोपाल की कई परिवारों के लिए यह दिवाली सिर्फ रोशनी और मिठाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि जीवन बदल देने वाली चोटों और मानसिक आघात का समय भी साबित हुई। माता-पिता का दर्द और अपराधबोध इस त्रासदी को और गहरा बनाता है।
कार्बाइड गन पर प्रतिबंध और सोशल मीडिया की भूमिका
मध्य प्रदेश सरकार ने कार्बाइड गन की बिक्री और रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है, और प्रशासन सक्रिय रूप से तत्कालीन कार्रवाई कर रहा है। बावजूद इसके, वायरल वीडियो और DIY गाइड्स के कारण इन खतरनाक उपकरणों का क्रेज बच्चों में बढ़ता गया।
विशेषज्ञों की चेतावनी
ऑल इंडिया ओफ्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी ने देशव्यापी प्रतिबंध की मांग की है और सार्वजनिक जागरूकता अभियान की आवश्यकता पर जोर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी घटनाएं भविष्य में बच्चों के लिए जीवनभर के लिए दृष्टिहानि और मानसिक पीड़ा ला सकती हैं।
सुरक्षा के उपाय और सीख
- बच्चों को कार्बाइड गन और अवैध पटाखों से दूर रखें।
- केवल लाइसेंसी फायरक्रैकर का उपयोग करें।
- माता-पिता और समुदायों को सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए।
- अगर किसी को चोट लगे, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें, देरी स्थायी नुकसान का कारण बन सकती है।
इस दिवाली ने हमें सिर्फ खुशियों की याद नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और जिम्मेदार उत्सव का महत्वपूर्ण पाठ भी दिया।





