लखनऊ यूनिवर्सिटी ने बढ़ाई समर्थ पोर्टल की डेडलाइन: कॉलेजों की राहत, छात्रों में उम्मीद की लहर

लखनऊ यूनिवर्सिटी ने समर्थ पोर्टल पर डेटा अपलोड की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2025 तक बढ़ा दी है। जानिए क्यों बढ़ानी पड़ी डेडलाइन, कॉलेजों की परेशानियां और छात्रों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

LU की बड़ी घोषणा – अब 31 अक्टूबर तक मिलेगा मौका

लखनऊ यूनिवर्सिटी (Lucknow University) ने अपने सभी संबद्ध कॉलेजों के लिए एक राहत भरी खबर दी है। अब पहले सेमेस्टर के छात्रों का डेटा समर्पण (data upload) करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2025 तक बढ़ा दी गई है।

यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि कई कॉलेजों ने शिकायत की थी कि समर्थ पोर्टल (Samarth Portal) पर तकनीकी समस्याओं की वजह से डेटा अपलोड का काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा था।

क्या है समर्थ पोर्टल (Samarth Portal)?

‘समर्थ पोर्टल’ केंद्र सरकार की एक डिजिटल इनिशिएटिव है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों में एडमिशन, परीक्षा, रिजल्ट और प्रशासनिक कामों को पूरी तरह ऑनलाइन बनाना है। Lucknow University ने इस पोर्टल को अपनाकर अपने सिस्टम को और पारदर्शी और आधुनिक बनाया है।

परंतु डिजिटल ट्रांजिशन हमेशा आसान नहीं होता — यही वजह है कि इस बार कई कॉलेजों को डेटा एंट्री और सर्वर एरर जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

कॉलेजों की दलील: स्टाफ की कमी और तकनीकी अड़चनें

Times of India और NDTV की रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई कॉलेजों ने यूनिवर्सिटी से गुहार लगाई थी कि उनके पास पर्याप्त नॉन-टीचिंग स्टाफ नहीं है जो डेटा एंट्री का सारा काम संभाल सके।
कई कॉलेजों ने कहा कि “हर छात्र का डेटा भरना, डॉक्यूमेंट स्कैन करना और अपलोड करना एक बड़ा और समय लेने वाला काम है।”

इसके साथ-साथ, पोर्टल पर बार-बार आने वाले लॉगिन इश्यू, सर्वर डाउन और धीमा अपलोड स्पीड जैसी समस्याएं भी बढ़ती गईं।

विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया

Lucknow University के रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कठिनाइयों को समझती है। इसलिए 31 अक्टूबर तक की अतिरिक्त मोहलत दी गई है।
साथ ही उन्होंने कहा कि “इस तारीख के बाद समीक्षा की जाएगी, और जरूरत पड़ी तो आगे का निर्णय लिया जाएगा।”

इस बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि यूनिवर्सिटी छात्रों और कॉलेजों दोनों के हित में लचीला रवैया अपनाने के मूड में है।

छात्रों की नजर से देखें तो…

इस फैसले से छात्रों को भी राहत मिली है। कई कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया देर से शुरू हुई थी, जिसकी वजह से छात्रों का डेटा पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पाया था।
अब जब तारीख बढ़ गई है, तो छात्रों को अपने डॉक्यूमेंट्स की त्रुटियों को ठीक कराने और डेटा सुनिश्चित करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

एक छात्रा ने कहा —

“हमारे कॉलेज में अभी तक फाइनल डेटा अपलोड नहीं हुआ था। अब यूनिवर्सिटी ने डेट बढ़ाई है तो थोड़ा सुकून मिला है कि हमारा रिकॉर्ड समय पर सही तरीके से अपडेट हो जाएगा।”

डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और कदम

समर्थ पोर्टल सिर्फ एक वेबसाइट नहीं है — यह डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक मजबूत कदम है।
लखनऊ यूनिवर्सिटी जैसी पुरानी और प्रतिष्ठित संस्था का इस पहल में सक्रिय रहना दर्शाता है कि भारत का शिक्षा तंत्र अब धीरे-धीरे तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन रहा है।

हालांकि, किसी भी सिस्टम को सफल बनाने के लिए ग्राउंड लेवल सपोर्ट, ट्रेनिंग और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर का मजबूत होना जरूरी है।

क्या आगे और बढ़ेगी डेडलाइन?

अभी तक यूनिवर्सिटी ने 31 अक्टूबर 2025 को अंतिम तिथि बताया है। लेकिन कई कॉलेजों ने यह मांग की है कि अगर तकनीकी दिक्कतें जारी रहती हैं तो उन्हें नवंबर के पहले हफ्ते तक का समय दिया जाए। यूनिवर्सिटी ने संकेत दिया है कि वह कॉलेजों के फीडबैक के आधार पर आगे का फैसला लेगी।

लखनऊ यूनिवर्सिटी का यह कदम एक समझदारी भरा फैसला है। डिजिटल बदलाव के इस दौर में जब हर विश्वविद्यालय ‘पेपरलेस’ सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, तब कॉलेजों को भी इस बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा। और साथ ही प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि टेक्नोलॉजी सबके लिए आसान और सुलभ हो आखिरकार, शिक्षा सिर्फ किताबों का नहीं, सुविधा और तकनीक का मेल भी है।