आंध्र प्रदेश में भीमावरम DSP जयसूर्या को लेकर राजनीतिक हालात लगातार गर्म हैं। उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और TDP विधायक रघुरामा कृष्णा राजू के बीच इस मामले को लेकर मतभेद सामने आए हैं, जिससे राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों में हलचल मची है।
DSP जयसूर्या पर आरोप है कि उन्होंने भीमावरम और पूर्वी गोदावरी जिलों में अवैध जुआ गतिविधियों, जैसे पोकर और कार्ड गेम्स को बढ़ावा दिया। इसके अलावा शिकायतें मिली हैं कि उन्होंने राजनीतिक नेताओं के नाम का दुरुपयोग किया और नागरिक विवादों में हस्तक्षेप किया।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन कल्याण ने पश्चिम गोदावरी के एसपी और डीजीपी को निर्देश दिया कि DSP के आचरण पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष और जिम्मेदार रहना चाहिए, और किसी भी अधिकारी को आपराधिक तत्वों का समर्थन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने गृह मंत्री और डीजीपी को भी औपचारिक रूप से सूचित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
वहीं, TDP विधायक रघुरामा कृष्णा राजू ने DSP जयसूर्या का समर्थन किया। उनका कहना है कि DSP एक ईमानदार अधिकारी हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि TDP सरकार ने जुआ गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखा है और ‘13 कार्ड’ जैसे गेम्स पर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई।
यह विवाद न केवल DSP मामले तक सीमित है, बल्कि यह स्पष्ट करता है कि पवन कल्याण और TDP के बीच प्रशासनिक और राजनीतिक मतभेद बढ़ रहे हैं। इससे गठबंधन सरकार के भीतर संतुलन और नीति कार्यान्वयन पर असर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्री और डीजीपी के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में निर्णय लिया गया कि DSP के आचरण की औपचारिक जांच होगी, ताकि कानून-व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि आंध्र प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सतर्क है। पवन कल्याण की सख्त प्रतिक्रिया और TDP नेता का विरोध, दोनों मिलकर यह दर्शाते हैं कि राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णयों पर लगातार निगरानी और दबाव बना रहता है।





