पूर्व सांसद उदित राज का दिल्ली सरकारी बंगले से जबरन निकाला जाना: क्या यह जातिगत भेदभाव है?

पूर्व सांसद उदित राज और उनकी पत्नी से दिल्ली के सरकारी बंगले से जबरन eviction ने उठाए जातिगत भेदभाव और राजनीतिक targeting के सवाल।

पूर्व सांसद उदित राज और उनकी पत्नी का सरकारी बंगले से eviction

पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता उदित राज और उनकी पत्नी सीमा राज, जो कि एक रिटायर्ड इंडियन रिवेन्यू सर्विस अधिकारी हैं, को 24 अक्टूबर 2025 को दिल्ली के Pandara Park स्थित सरकारी बंगले से जबरन निकाला गया।

बंगला आधिकारिक तौर पर उनकी पत्नी के नाम पर आवंटित था और दोनों ने वहां सीमा राज की रिटायरमेंट के बाद कुछ महीने तक निवास किया। उदित राज का कहना है कि यह eviction फोर्सफुल्ली Directorate of Estates द्वारा किया गया, जबकि मामला अभी sub judice है और कोर्ट में सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित है।

उदित राज के आरोप: राजनीतिक और जातिगत targeting

उदित राज ने आरोप लगाया कि यह कदम selective targeting और motivated action था, जो विशेष रूप से नीचे जाति के विपक्षी नेता को निशाना बनाने के लिए लिया गया। उन्होंने कहा कि:

“कई ऊपरी जाति के लोग सरकारी बंगलों में रहते हैं लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती।”

उदित राज ने यह भी बताया कि उन्होंने Union Minister Manohar Lal Khattar से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई उच्च अधिकारी उपलब्ध नहीं थे और उन्हें eviction की तात्कालिकता की कोई जानकारी नहीं दी गई।

सीमा राज की अपील और प्रशासन की अनदेखी

सीमा राज ने बताया कि उन्होंने accommodation का license fee 31 मई 2025 तक भरा और extension की मांग की थी। उन्होंने अपने पिता की लंबी बीमारी और उनके बाद हुई मृत्यु के कारण निवास जारी रखने का कारण बताया।

लेकिन प्रशासन ने reportedly इस plea को नजरअंदाज कर दिया और eviction प्रक्रिया शुरू कर दी।

मानव भावनाओं की झलक

यह सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें परिवार की भावनात्मक तकलीफ, असुरक्षा की भावना और जातिगत असमानता की कहानी भी छिपी है।

उदित राज और उनकी पत्नी की उम्र और जीवन की स्थिति को देखते हुए, यह eviction एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बन जाता है।

सोशल मीडिया और जनता में इस मामले ने जातिगत न्याय और सरकारी पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।