जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने भाजपा पर उम्मीदवारों पर दबाव डालने का आरोप लगाया

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीति में नया मोड़ आया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं ने उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को धमकाया और दबाव डालकर उनके नामांकन वापस कराए।

आरोपों का विवरण

प्रशांत किशोर ने बताया कि गोपालगंज, दानापुर और ब्रह्मपुर से उनके उम्मीदवारों को धमकाया गया।

  • गोपालगंज: डॉ. शशि शेखर सिन्हा ने अचानक स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए नामांकन वापस लिया।
  • दानापुर: अखिलेश कुमार उर्फ मटर साओ ने अंतिम दिन नामांकन दाखिल नहीं किया।
  • ब्रह्मपुर: डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी ने नामांकन दाखिल किया लेकिन बाद में वापस लिया।

किशोर का कहना है कि यह भाजपा की रणनीति का हिस्सा था, ताकि उनकी पार्टी की स्थिति कमजोर हो।

चुनाव आयोग से मांग

प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उम्मीदवार सुरक्षित नहीं रह सकते, तो मतदाताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया। पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह आरोप निराधार हैं और विपक्ष की चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं।

राजनीतिक विश्लेषण

यदि आरोप सही हैं, तो यह बिहार की राजनीति में गंभीर संकेत हैं। विपक्षी उम्मीदवारों पर दबाव डालना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ माना जा सकता है। वहीं, भाजपा का खंडन यह दिखाता है कि चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप आम हैं।

निष्कर्ष

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी के संस्थापक द्वारा लगाए गए आरोपों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। चुनाव आयोग की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण होगी और यह देखना होगा कि ये आरोप चुनावी प्रक्रिया पर क्या असर डालते हैं।