Priyank Kharge vs Himanta Biswa Sarma का सेमीकंडक्टर विवाद सोशल मीडिया पर छा गया है। जानिए कैसे यह निवेश की जंग अब राजनीतिक और भावनात्मक मुद्दा बन गई है।
जब ट्वीट बने जंग का मैदान
भारत की टेक्नोलॉजी रेस अब सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि राज्यों की प्रतिष्ठा और राजनीति का सवाल बन चुकी है। हाल ही में कर्नाटक के आईटी-बीटी मंत्री प्रियंक खड़गे और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बीच सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग ने यही दिखाया — सेमीकंडक्टर निवेश अब सिर्फ एक इंडस्ट्रियल मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक भावनाओं का रणक्षेत्र बन चुका है।
विवाद की जड़: निवेश का ‘डाइवर्जन’ या राजनीतिक बयानबाज़ी?
प्रियंक खड़गे ने दावा किया कि कुछ सेमीकंडक्टर कंपनियों के निवेश, जो पहले कर्नाटक के लिए तय थे, उन्हें अब असम और गुजरात की ओर मोड़ दिया गया है। उनका तर्क था कि इन कंपनियों ने कर्नाटक को इसलिए चुना था क्योंकि यहाँ की इंजीनियरिंग टैलेंट और आईटी इकोसिस्टम सबसे मजबूत है।
खड़गे के इस बयान को कई मीडिया आउटलेट्स ने इस तरह पेश किया कि उन्होंने कहा “असम में टैलेंट नहीं है” — और यहीं से बवाल शुरू हुआ।
हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रियंक खड़गे को “फर्स्ट क्लास इडियट” तक कह डाला। उन्होंने कहा कि खड़गे ने असम के युवाओं का अपमान किया है और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
असम बीजेपी ने भी सोशल मीडिया पर “Hello Teddy Boy” कहकर प्रियंक खड़गे का मज़ाक उड़ाया, जो तुरंत वायरल हो गया। इस जुमले ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया।

प्रियंक खड़गे की सफाई – “मेरे शब्दों को तोड़ा-मरोड़ा गया”
प्रियंक खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने कहा, “मैंने कभी असम के युवाओं का अपमान नहीं किया। मेरा सवाल सिर्फ इतना था — जब कर्नाटक में तैयार इकोसिस्टम है, तो निवेश क्यों डाइवर्ट किया जा रहा है?”
उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा पर तंज कसते हुए पूछा,
“अगर असम में इतना विकास हुआ है तो वहां के युवा बाहर काम करने क्यों जा रहे हैं?”
उनका इशारा था कि असम अब भी रोजगार और विकास के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है।
असल मुद्दा क्या है?
- इंडस्ट्रियल रेस: भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर कई राज्य एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा में हैं। केंद्र सरकार द्वारा किसी राज्य को प्राथमिकता देना अब राजनीतिक विषय बन चुका है।
- टैलेंट नैरेटिव: कर्नाटक का आईटी सेक्टर विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है, जबकि असम अभी टेक हब बनने की प्रक्रिया में है। लेकिन, इसे “नो टैलेंट जोन” कहना न सिर्फ गलत है बल्कि असंवेदनशील भी।
- राजनीतिक पृष्ठभूमि: कांग्रेस बनाम बीजेपी की खींचतान अब इंडस्ट्रियल डेवेलपमेंट के एजेंडे में भी दिखने लगी है।
- सोशल मीडिया पॉलिटिक्स: इस विवाद ने यह भी दिखाया कि अब नीतिगत चर्चाएँ भी X (ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म पर ही तय हो रही हैं।
जनभावना और सोशल मीडिया रिएक्शन
ट्विटर (अब X) पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ दो हिस्सों में बंटी रहीं —
कुछ ने कहा, “प्रियंक खड़गे ने जो कहा, वो सच है, क्योंकि कर्नाटक में वाकई टेक इंडस्ट्री के लिए तैयार इकोसिस्टम है।”
वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने कहा, “असम का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
यह बहस अब इकोनॉमिक रियलिटी बनाम इमोशनल पॉलिटिक्स का रूप ले चुकी है।
सेमीकंडक्टर निवेश का विवाद अब महज आर्थिक बहस नहीं रहा। यह दिखाता है कि भारत के राज्यों के बीच विकास, रोजगार और सम्मान को लेकर कितनी गहरी प्रतिस्पर्धा है।
प्रियंक खड़गे और हिमंत बिस्वा सरमा का यह ऑनलाइन वार-पलटवार भले ही सोशल मीडिया की सुर्खियाँ हों, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा सवाल छिपा है —
“क्या भारत के राज्यों में निवेश का बंटवारा राजनीतिक पसंद से तय हो रहा है?”
और अगर ऐसा है, तो असली नुकसान किसका होगा? निवेश का या देश के युवाओं का?





